आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale by Krishna Kumari Download Free PDF Hindi

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale
Author 🖊️
आकार / Size 1.5 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖57
Last UpdatedFebruary 26, 2022
भाषा / Language Hindi
Category

गद्य साहित्य की विविध विधाओं में ‘यात्रा-वृत्त’ का अपना ही महत्व है। ‘अज्ञेय’ जी की काव्यात्मक गद्य भाषा में जब उन के यात्रा-वर्णन प्रकाशित हो रहे थे, तब इस विधा-विशेष ने ध्यान आकर्षित किया था। रांगेय राघव ने बंगाल के अकाल पर गद्य-विधा में यात्रा-वृत्त, डायरी तथा रिपोर्ताज को मिला कर एक नया रूप प्रस्तुत किया था। प्रकृति के प्रति जिन सहृदय साहित्यकारों में सहज आकर्षण है, उन्हें यात्रा की सुखानुभूति, रचना-कर्म की ओर प्रेरित कर रही है। कृष्णा कुमारी के अप्रकाशित सिंगापुर की यात्रा के वर्णनानुभव देखने का अवसर मिला है। लेखिका ने जिस प्रकार सूक्ष्म दृष्टि से बारीक ब्यौरों में वहाँ के वस्तु-जगत से सम्पर्कित अनुभूतियों का जो चित्रण किया है, वह अविस्मरणीय है। मैं अपने जीवन में, देश-विदेश में बहुत घूमा हूँ, पर न जाने क्यों ब्यौरे और उन के चित्त पर बनी स्मृतियाँ, समय के साथ धूमिल होती चली गई है। यह विधा, शुद्ध अतिरेक की माँग करती है, वह क्षमता कृष्णा जी के पास है। उन का मन सहज जिज्ञासा, कौतुहल के साथ वस्तु-जगत से सम्पर्क करता है। यह इन्द्रिय जन्य ज्ञान, अक्सर बुद्धि के दाँव-पेच छोड़ता हुआ, उन के अनुभव-जगत में उन्हें ले जाता है। यह उन का सहज स्वभाव है, यहाँ कृत्रिम, बनावटीपन नहीं है। प्रकृति उन के ही सम्मुख अपना हृदय खोल पाती है, जहाँ अनुभव की यात्रा में बुद्धि जन्य प्रत्यय बाधक न हो, एक दर्पण की तरह मनोग्राही दर्शन, चित्रित होता चला जाता है। ‘आओ नैनीताल चलें’ की भाषा प्रवाही तथा प्रभावी है। कोटा से गाजि़याबाद तथा वहाँ से काठगोदाम, नैनीताल अल्मोड़ा, कौसानी, मल्लीताल, तल्लीताल, हिमालय, फ़िल्म की शूटिंग...छाटे-छोटे ब्यौरे और उन के साथ जुड़ी आत्मीयता विरल है। यात्रा वृत्त एक मूवी कैमरे की आँख से सम्पूर्ण परिदृश्य को दिखाता चला जाता है। भाषा की यही चित्रात्मकता, सघन बिम्बात्मकता...कविता के साथ, गति लेती है, लगता है पास बहती हुई नदी कल-कल धारा के साथ आप भी चल रहे हों। यह बात दूसरी है कि आज की दुनिया में भ्रमण तो होता है, पर उस का अनुभव-जगत बाहर ही रह जाता है। बुद्धिगत अभिगम, भीतर तक उस अनुभव को प्रवाहित नहीं होने देता।

 

पुस्तक का कुछ अंश:-

प्रकृति की अप्रितम सुन्दरता में, नैसर्गिक सौन्दर्य में जादुई आकर्षण होता है। जिस के पाश में बँध कर इन्सान पर्यटक बनने को विवश हो जाता है। जो एक बार इस अद्भुत रस का आस्वादन कर लेता है, वह बार-बार इसे पीने के लिए मचल-मचल जाता है। यही कुछ हमारे साथ होने लगा है। एक बार पर्वतीय वादियों में क्या घूम आए कि थोड़े-थोड़े दिनों में वहाँ जाने के बहाने ढूँढने लगते हैं। हम गलत भी कहाँ हैं। इस दौड़ती-भागती ज़िंदगी में कुछ पल वैन और सुकून के बिताना भी चाहिएं ताकि जीवन में सन्तुलन बना रहे। और फिर कुदरत का वह शान्त वातावरण, हरी-भरी वादियाँ, कलकल निनादित निर्झर, चट्टानों से फूट कर बेतहाशा भागती दौड़ती नदियाँ, गगन चूमती पर्वत मालाएँ, सागर का सौम्य स्वरूप अहा! आनंद के ऐसे स्रोत भला और कहाँ प्राप्त हो सकते हैं। अब तो स्वप्निल (बिटिया) भी बार-बार भ्रमण करने की जिद करने लगी है।
हमारे रचनाकार होने का भी हमें कुछ लाभ मिल रहा है। देश के कोने-कोने में कार्यक्रम होते रहते हैं, हमें भी खूब आमन्त्रण मिलते हैं। खूबसूरत स्थान के प्रोग्राम को हम बिल्कुल नहीं छोड़ते। सितम्बर, 2002 ई. में गाजियाबाद से हमें ‘दलित साहित्य अकादमी’ के वार्षिक समारोह का निमन्त्रण मिला और हम लोगों ने वहाँ से नैनीताल जाने का कार्यक्रम भी बना डाला| क्योंकि घूमने के लिए सितम्बर-अक्टूबर का समय ही श्रेष्ठ होता है। पर्यटन स्थलों पर इस समय मई-जून जैसी भीड़-भाड़ नहीं रहती एवं क़ीमतें भी काफी कम हो जाती हैं।

इस कार्यक्रम में कोटा के दो रचनाकार भी हमारा साथ दे रहे थे। अकेले तो हम भी नहीं जाते। निश्चित समय पर हम देहरादून एक्सप्रेस से रवाना हुए। शाम का खाना हम लोगों के साथ था ही। रात को 10 बजे हम सब ने मिल कर खाना खाया, फिर कुछ हँसी-मज़ाक़ विनोद होता रहा। लगभग 12 बजे हम सब अपनी-अपनी बर्थ पर हो लिए। थोड़ी देर आँख लगती, फिर खुल जाती। लेकिन सुबह 4 बजे बड़ी ज़ोर की आवाजें होने लगीं। नींद खुलनी ही थी, हम ने नीचे देखा तो हमारे पास की बर्थ पर एक छोटा-सा सामान्य परिवार था, जिन का सुबह का कार्यक्रम प्रारम्भ हो चुका था। उन्हीं के दो बच्चे बहुत चुलबुले थे, बहुत बतिया रहे थे, उन की बोल-चाल में गाँव का प्रभाव स्पष्ट नज़र आ रहा था। बव्वा सातवीं कक्षा में पढ़ता था, ऐसा उसी की बातों से ज्ञात हुआ।

हमने आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए लिंक निचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 1.5 MB है और कुल पेजों की संख्या 57 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक   कृष्णा कुमारी / KRISHNA KUMARI   हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale को जरूर शेयर करेंगे। धन्यवाद।।
Q. आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale किताब के लेखक कौन है?
Answer.   कृष्णा कुमारी / KRISHNA KUMARI  
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