बहुजन साहित्य की प्रस्तावना / Bahujan Sahitya Ki Prastaawanaa

साहित्य की दुनिया में निष्कर्ष से अधिक महत्वपूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रकिया होती है। जब हम कोई उपन्यास पढ़ रहे होते हैं, तो हमारे लिए क्लाइमेक्स से अधिक महत्वपूर्ण उसमें आया जीवन होता है। यही बात कविता, कहानी व साहित्य की अन्य विधाओं के बारे में भी सही है और प्रकरांतर से यही बात इस किताब पर लागू होती

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