देहाती लड़के / Dehaati Ladke PDF Download Free Hindi Book by Shashank Bharatiya

पुस्तक का विवरण (Description of Book of देहाती लड़के / Dehaati Ladke PDF Download) :-

नाम 📖देहाती लड़के / Dehaati Ladke PDF Download
लेखक 🖊️
आकार 1.87 MB
कुल पृष्ठ192
भाषाHindi
श्रेणी
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वो लड़के होते हैं ना, जो पहली बार शहर आते हैं। आँखों में भारत के चुनिंदा क्लेम टू फेम एसएससी, बैंकिंग और यूपीएससी का सपना और बस्ते में गाँव से भेजा गया देसी घी और अचार लिए। इंटर कॉलेज के कुएँ से निकलकर, यूनिवर्सिटी के तालाब में डर-डरकर कदम रखते हुए। जवानी के बेहतरीन दिनों में कमरे में बंद रीजनिंग और मैथ्स लगाते हुए। बस वैसे ही एक लड़के की कहानी है ये। आया तो है उम्मीदें, उमंगें और उसूल लेकर, मगर उस गुस्ताख़ उम्र का क्या किया जाए? पक्की वाली दोस्ती भी इसी में होती है, कोई अच्छा भी लगने लगता है और लक्ष्य भी हासिल करने होते हैं। इन सबको समेटने में कुछ-कुछ तो है जो छूट जाता है... इस कुछ-कुछ के आसपास बुनी हुई कहानी है- देहाती लड़के।


पुस्तक का कुछ अंश

कॉफी की आखिरी चुस्की लेते हुए मैंने सड़क की दूसरी तरफ खड़ी इमारत की ओर देखा।
दीवार पर उभरे सुनहरे भव्य अशोक चिह्न के ठीक ऊपर वाली घड़ी दो बजकर तीन मिनट बजा चुकी थी। सूरज की तिरछी किरणें अशोक चिह्न के नीचे, मोटे सुनहरे अक्षरों में लिखे 'भारत सरकार' को दमका रही थीं। आगे की तख्ती पर 'कोष मूलो दण्डः' सुशोभित कारों का काफिला दो मिनट पहले ही रवाना हुआ था। सड़क पर दूर तक फैली पीपल की चरमराती हुई पत्तियाँ थोड़ी दूर उड़कर कारों के साथ गई थीं, फिर चौराहे पर खड़े, दांडी जाने को उद्धत बापू के पास जाकर थिरा गई थीं। उड़ी हुई धूल और धुएँ का गुबार पट रहा था और दहलीज तक छोड़ने आए अफसरान वापस बिल्डिंग में लौट रहे थे। सिक्यूरिटी हेड कमलेश के हाथों ने आज औसत से तीन गुना ज्यादा 'जय हिंद' किया था। साहबों के अंदर जाने के बाद वह वापस अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया था। मैंने कॉफी खत्म करके कप प्लेट में रखा, प्लेट के नीचे की पर्ची निकाली और काउंटर की तरफ चला आया। होटल मैनेजर सुनील ने पर्ची मेरे हाथ से ली और बिना देखे बगल रखी कील में घोंप दी। उसे पता है
कि बिल पिछले 3 सालों से बिला नागा 25 रुपया ही है। फुटकर पैसे वापस करते हुए बोला, "बड़े साब आए थे… आप नहीं गए?" मैंने पैसे समेटकर जेब में डाले और उसकी आँखों में
देखा। वक्ती तौर पर लगा कि उसे जवाब दूंगा, मगर मुस्कुराया और होटल से बाहर निकल आया। सड़क पार की और इमारत की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा। 53 साल पहले बनी यह इमारत बाहर से जितनी उदासीन दिखती है, अंदर से उतनी ही भव्य है। भारत सरकार के अन्य दफ्तरों की तरह जर्जर नहीं। दहलीज पार कर एक गोल बरामदा है, जहाँ सोफे पड़े हैं। जिसके ऊपर की गुंबदाकार छत शीशे की है। फिर लगभग सौ फीट लंबा गलियारा है। गलियारे के दोनों तरफ अधिकारियों के दफ्तर हैं, जिनके सामने उनके नाम और प्रभार की तख्तियाँ लगी हैं। हर दस फुट पर प्लास्टिक फूलों के गमले रखे हैं। गलियारा खत्म होते ही
फिर एक गोल बैठक है, जहाँ से तीन तरफ को रास्ते गए हैं। तीनों तरफ अलग-अलग विंग के ऑफिस हैं। चौथी मंजिल तक बिल्डिंग का ढाँचा ऐसा ही है।

हमने देहाती लड़के / Dehaati Ladke PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए लिंक निचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 1.87 MB है और कुल पेजों की संख्या 192 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक   शशांक भारतीय / Shashank Bharatiya   हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ देहाती लड़के / Dehaati Ladke को जरूर शेयर करेंगे। धन्यवाद।।
Q. देहाती लड़के / Dehaati Ladke किताब के लेखक कौन है?
Answer.   शशांक भारतीय / Shashank Bharatiya  
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