मनोविज्ञान और शिक्षा / Manovigyan Aur Siksha

पुस्तक का कुछ अंश प्रथम संस्करण का प्राकथन मानव को पूर्णरूपेण समझने के लिये हमारे पूर्वजों ने शताब्दियो तक चिन्तन, अध्ययन तथा परिश्रम किया है। इसी के फलस्वरूप दर्शन-शास्त्र का जन्म हुआ। दर्शन-शास्त्र का क्षेत्र दिन पर दिन वढता ही गया और बढ़ता जा रहा है, क्योकि मानव-सम्बन्धी हमारी जिज्ञासाओ का अभी तक समाधान नहीं हो सका है। इस समाधान

» Read more