मन पतंग दिल डोर / Man Patang Dil Dor

यह कोई किताब नहीं है, वरन एक यात्रा है और मैं इस यात्रा का साक्षी भर हूँ। प्रेम कितना मोहक, सम्मोहक और मादक होता है.. उसके विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए मैंने यह जाना है। ‘मन पतंग दिल डोर’ को लिखते हुए मैंने महसूस किया है कि मोहब्बत का कोई मौसम नहीं होता। वो जब हो जाए वही उसका मौसम

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चाय सी मोहब्बत / Chaay Si Mohabbat

लिखना मेरी आदत नहीं है, लिखना इबादत है। और इबादत ही तो मोहब्बत है… मोहब्बत मुझे चाय-सी लगती है। चाय और मोहब्बत दोनों की तासीर गर्म होती है पर दोनों ही रूह में ताज़गी और ठंडक भरती हैं। ये कविताएँ और इनका कवि कैसा है यह फ़ैसला तो सुधी पाठक करेंगे पर यह आपके ज़ेहन को मोहब्बत से सराबोर करेंगी

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