चिरकुट दास चिंगारी / Chirkut Das Chingari

ग्रामीण पृष्ठभूमि में रचे-बसे वसीम अकरम के पहले उपन्यास ‘चिरकुट दास चिंगारी’ में ग्रामीण परिवेश, पात्र और बोली अपने बेहद मौलिक स्वरूप में प्रस्तुत हुए हैं। एक पात्र की तेरहवीं से शुरू होकर एक अन्य पात्र की तेरहवीं पर खत्म होने वाले इस कथानक में जीवन के विविध रंग बहुत जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुए हैं। इन्हीं में से एक

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