अनदेखा खतरा / Andekha Khatra 

जूही मानसिंह को लगता था, कोई है जो उसकी जान लेना चाहता है। वो हर वक्त खुद को एक अनजाने-अनदेखे खतरे से घिरा हुआ महसूस करती थी। उसका दावा था कि उसकी हवेली में नर-कंकाल घूमते थे! मरे हुए लोग अचानक उसके सामने आ जाते और फिर पलक झपकते ही गायब हो जाते थे। बंद कमरे में उसपर गोलियां चलाई

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माया मिली न राम / Maya Mili Na Ram

दौलत और शोहरत दो ऐसी चीजें थीं, जिन्हें हासिल करने की खातिर सब-इंस्पेक्टर निरंकुश राठी किसी भी हद तक जा सकता था। स्याह को सफेद कर सकता था, बेगुनाह को फांस सकता था, मुजरिम के खिलाफ जाते सबूतों को नजरअंदाज कर सकता था। प्रत्यक्षतः वह ऐसा करप्ट पुलिसिया था जिसका नौकरी को लेकर कोई दीन ईमान नहीं था। ऐसे में

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प्रतिघात / Pratighat

अंकुर रोहिल्ला दौलतमंद, आशिक मिजाज, बदनीयत शख्स था। उसकी निगाहें अपने ही किरायेदार की नाबालिग बेटी अफसाना पर टिकी हुई थीं। फिर एक रात लड़की अपने कमरे से गायब हो गयी। बाप को शक था कि बेटी के गायब होने में अंकुर का कोई न कोई हाथ जरूर था। वह फरियाद लेकर महा करप्ट पुलिसिये निरंकुश राठी के पास पहुंचा।

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