लोक व्यवहार | Lok Vyavhar Book PDF Download Free in Hindi by Dale Carnegie

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥लोक व्यवहार PDF | Lok Vyavhar
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 1.5 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖136
Last UpdatedAugust 17, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

पुस्तक 'हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल' व्यक्तित्व विकास पर बहुत कुछ प्रस्तुत करती है और इस प्रकार आपको एक असाधारण व्यक्ति बनाती है। किताब लोगों को संभालने की बुनियादी तकनीक और लोगों से निपटने का बड़ा रहस्य मुहैया कराती है। इस पुस्तक को पढ़ने से आपको एक सबसे अच्छी चीज मिलती है कि 'दूसरे लोगों के दृष्टिकोण से हमेशा सोचने और चीजों को उनके कोण से देखने की बढ़ती प्रवृत्ति', आसानी से आपके करियर के निर्माण ब्लॉकों में से एक साबित हो सकती है। पुस्तक आपको 'मुस्कुराहट का मूल्य', और एक अच्छा संवादी कैसे बनें जैसे एक अच्छा पहला प्रभाव बनाने के लिए बहुत ही सरल तरीके सुझाती है। यह स्वयं सहायता पुस्तक आपके जैसे लोगों को बनाने और उन्हें अपने सोचने के तरीके से जीतने के लिए बहुत ही सरल तरीके प्रदान करती है, और सुझाव देती है कि मैत्रीपूर्ण तरीके से कैसे शुरुआत करें।
पुस्तक में सुकरात के रहस्य का उल्लेख है, जो श्रोताओं की सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को निर्धारित करता है। पुस्तक नेतृत्व गुणों को विकसित करने में भी मदद करती है। विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों के साथ एक विस्तृत अध्ययन, घटनाओं का उल्लेख यहां किया गया है ताकि प्रत्येक अवधारणा स्पष्ट और समझने में आसान हो।
इसके अलावा, डेल कार्नेगी ने विभिन्न पुस्तकालयों में डेढ़ साल बिताने के लिए एक प्रशिक्षित शोधकर्ता को काम पर रखा था, जो उसने याद किया था, अनगिनत आत्मकथाओं के माध्यम से, सैकड़ों पत्रिका लेखों की खोज कर रहा था, यह पता लगाने की कोशिश कर रहा था कि महान नेताओं ने लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया था। यह मानवीय संबंधों में आपके कौशल में तेजी से वृद्धि करेगा। पुस्तक की भाषा सुबोध और सरल है। सभी के लिए एक अवश्य पढ़े जाने वाली पुस्तक।

पुस्तक का कुछ अंश

मानव जीवन में लोक व्यवहार का बहुत महत्त्व है, बल्कि यह कहा जाए कि लोक व्यवहार में कुशलता ही मनुष्य को इनसान बनाती है, उसे सफलता के द्वार तक पहुँचाती है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बिना उचित लोक व्यवहार के लोक को जीतना असंभव है। लोक व्यवहार व्यक्ति का कायांतरण कर देता है। जैसे खदान से निकलनेवाले खनिज को तपाकर सोना बनाया जाता है, वैसे ही लोक व्यवहार की चाशनी में पककर व्यक्ति खरा सोना बन जाता है। इस पुस्तक में डेल कारनेगी ने लोक व्यवहार को जीवन में उतारने के लिए जो-जो नियम, सिद्धांत तय किए हैं; जीवन में उन्हें अपनाना जरा भी कठिन नहीं है, इन्हें कोई भी सरलता से अपना सकता है। इसमें जेब से पाई भी खर्च नहीं करनी पड़ती; अलबत्ता जेब मान-सम्मान, धन-दौलत, इज्जत-शौहरत इत्यादि लोकोपयोगी संसाधनों से भरी रहती है। क्यों न इस सद्गुण को जीवन में अपनाया जाए–आज ही से शुरू करें।

लोक व्यवहार के सामान्य नियम

• अपनी बातों को नाटकीय अंदाज में पेश करें और चमत्कारी परिणाम देखें। अपनी सभी गलतियाँ तथा कमियाँ गिनाने के बाद ही किसी की कमियाँ गिनाएँ।
• अपने विचार को इस दृढता से पेश करें कि सामनेवाले को वह अपना ही विचार लगने लगे।
• आदर्शवाद के सिद्धांत को जीवन में प्रश्रय दें।
• आदेश देने की बजाय प्रश्न पूछें।
• ईमानदारी के साथ सामनेवाले इन्सान का नजरिया समझने की कोशिश करें। ईमानदारी के साथ सामनेवाले को उसका दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का अवसर दें और उसके विचारों तथा इच्छाओं के प्रति सहानुभूति दर्शाएं।
• काम या बात की शुरुआत दोस्ती भरे अंदाज में करें और सामने वाले को ज्यादा बोलने का अवसर दें।
• गलती होने पर उसे स्वीकार करने में झिझके नहीं। चुनौतियाँ दीजिए और लीजिए।
• दूसरों को प्रोत्साहित करते हुए बताएँ कि गलतियों को सुधारना कठिन काम नहीं है।
• बहस का लाभ यह है कि उससे बचकर निकल जाएँ।
• बात इस प्रकार आरंभ करें कि सामनेवाला तुरंत 'हामी भर दे।'
• लोगों की गलतियों को दो टूक बताने की भूल कभी न करें।
• व्यक्ति को एक ऐसी छवि में कैद कर दें, जिसे वह बदलना न चाहे।


इस पुस्तक से अधिकाधिक लाभ लेने के तरीके

यदि आप इस पुस्तक से अधिक-से-अधिक लाभ उठाना चाहते हैं तो एक अपरिहार्य एवं किसी भी नियम अथवा विधि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण शर्त का होना आवश्यक है। जब तक आपके पास वह आवश्यक शर्त नहीं है, तब तक अध्ययन करने के ढंग के आपके हजारों नियम भी व्यर्थ हैं, किंतु अगर आप के पास वह प्रधान गुण है, तो आप किसी भी पुस्तक से बिना सुझाव पढ़े कोई कमाल कर सकते हैं। वह चमत्कारित शर्त क्या है? वह है-सीखने की गहन एव प्रेरक उत्कंठा तथा चिंता रोकने और जीवनयापन करने का प्रबल एवं दृढ संकल्प। ऐसी उत्कंठा का विकास आप कैसे कर सकते हैं? आप अपने आप को निरंतर स्मरण दिलाते रहकर कि ये सिद्धांत कितने प्रमुख हैं, यह कर सकते हैं। अपने सामने एक चित्र खींचिए कि उन सिद्धांतों का प्रभाव आप को वैभवपूर्ण और अधिक सुखी जीवन बिताने में किस प्रकार सहायता करेगा। मन-ही-मन बार-बार दुहराते रहिए कि 'मेरे मस्तिष्क की शांति, मेरा सुख, मेरा स्वास्थ्य और संभवतः आगे जाकर मेरी आय भी बहुत हद तक इस पुस्तक में बताए गए पुरातन, सहज एवं निरंतन सत्यों के प्रयोग पर निर्भर करती है।'
प्रत्येक अध्याय को पहले जल्दी-जल्दी सरसरी निगाह से पढ़ जाइए। आप को शायद अगला अध्याय पढ़ने का लोभ हो आए, किंतु ऐसा मत कीजिए। यदि आप केवल मनोरंजन के लिए पढ़ रहे हैं तो बात दूसरी है, किंतु यदि आप चिंता का निवारण कर जीवनयापन करने के लिए पढ़ रहे हैं तो प्रत्येक अध्याय को सांगोपांग दुहरा लीजिए। आगे चलकर इससे आपके समय की बचत होगी और उसका परिणाम भी निकलेगा।

पढ़ते समय पढ़ी हुई सामग्री पर विचार करने के लिए बार-बार रुकते जाइए, मन-ही-मन सोचिए कि प्रत्येक सुझाव का प्रयोग आप कब और कैसे कर सकते हैं। इस प्रकार का पढ़ना जल्दी पढ़ने से कहीं अधिक सहायक होगा। पढ़ते समय अपने हाथ में पेंसिल, लाल पेंसिल या पेन रखिए और जब कभी आप ऐसा सुझाव पढ़े व आपको लगे कि उसका उपयोग आप कर सकते हैं, तो उसके पास एक लकीर खींच लीजिए। यदि वह चार तारोंवाला संकेत हो तो प्रत्येक वाक्य के नीचे लकीर खींचिए या उसपर क्रॉस का चिह्न लगा दीजिए। चिह्न लगाने और नीचे लकीर खींचने से पुस्तक अधिक मनोरंजक बन जाती है और जल्दी से उसकी पुनरावृत्ति करने में सरलता हो जाती है।
मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानता है, जो पंद्रह वर्ष से एक बड़ी इंश्योरेंस कंपनी का मैनेजर है। वह हर महीने अपनी कंपनी द्वारा जारी किए गए इंश्योरेंस के सभी इकरारनामे पढ़ता है और वह उन्हें महीनों एवं वर्षों तक पढ़ता रहता है। क्यों? इसलिए कि उसने अनुभव से यह सीखा है कि उन इकरारनामों की शर्तों को ठीक-ठीक याद रखने का यही एक तरीका है।

एक बार मैने पब्लिक स्पीकिंग पर एक पुस्तक लिखने में लगभग दो वर्ष बिता दिए, फिर भी अपनी पुस्तक में जो कुछ भी मैंने लिखा था, उसे याद रखने के लिए उस पुस्तक को समय-समय पर मुझे पढ़ते रहना पड़ता है। जिस शीघ्रता से हम बातों को भूल जाते हैं, उसपर आश्चर्य होता है। इसलिए यदि आप इस पुस्तक से वास्तविक और स्थायी लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो यह मत समझिए कि एक बार इसे सरसरी निगाह से देख लेना पर्याप्त है। इसको भली-भाँति पढ़ लेने के बाद आपको चाहिए कि हर महीने इसे दुबारा पढ़ने में आप कुछ घंटे खर्च करें और प्रतिदिन इसे आप अपनी डेस्क पर अपने सामने रखें। प्रायः इसे उलटते-पलटते और निरंतर अपने मन पर संस्कार डालते रहें कि इस पुस्तक की सहायता से आप कितनी बड़ी उन्नति कर सकते हैं। याद रखिए, इन सिद्धांतों का निरंतर प्रयोग तथा दोहराव ही इन्हें आपके स्वभाव का एक अंग बना सकेगा और तभी आप अनजाने ही इन पर आचरण करने लगेंगे। इसके सिवा दूसरा कोई उपाय है ही नहीं।

बर्नाड शॉ ने एक बार कहा था, "यदि आप किसी मनुष्य को कोई बात सिखाना चाहेंगे तो वह कभी नहीं सीखेगा।" शॉ का यह कथन सही था सीखना एक सक्रिय प्रक्रिया है। हम काम करके ही सीखते हैं। इसलिए यदि आप उन सिद्धांतों पर पूर्ण प्रभुत्व पाना चाहते हैं, जिनका अध्ययन आप इस पुस्तक में कर रहे हैं, तो उनके संबंध में कुछ कीजिए। जब भी सुयोग मिले, इन नियमों का प्रयोग कीजिए। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें जल्दी ही भूल जाएँगे। केवल वही ज्ञान मस्तिष्क में टिकता है, जिसका उपयोग किया गया हो।

हमने लोक व्यवहार PDF | Lok Vyavhar PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए लिंक निचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 1.5 MB है और कुल पेजों की संख्या 136 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक   डेल कारनेगी / Dale Carnegie   हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ लोक व्यवहार PDF | Lok Vyavhar को जरूर शेयर करेंगे। धन्यवाद।।
Q. लोक व्यवहार PDF | Lok Vyavhar किताब के लेखक कौन है?
Answer.   डेल कारनेगी / Dale Carnegie  
Download

_____________________________________________________________________________________________
आप इस किताब को 5 Stars में कितने Star देंगे? कृपया नीचे Rating देकर अपनी पसंद/नापसंदगी ज़ाहिर करें।साथ ही कमेंट करके जरूर बताएँ कि आपको यह किताब कैसी लगी?
Buy Book from Amazon
5/5 - (26 votes)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *