मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus PDF Download Free Hindi Book by John Gray

पुस्तक का विवरण (Description of Book of मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus PDF Download) :-

नाम 📖मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus PDF Download
लेखक 🖊️
आकार 4.4 MB
कुल पृष्ठ100
भाषाHindi
श्रेणी
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इस विश्वविख्यात पुस्तक में बताया गया है कि पुरुषों और महिलाओं की विचारधारा अलग-अलग होती है, जिस वजह से उनमें सही तालमेल नहीं हो पाता। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इसे पढ़ना अनिवार्य है, ताकि घर में संघर्ष के बजाय प्रेम का माहौल बने।

 

पुस्तक का कुछ अंश

विषय-सूची

प्रस्तावना

1.पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं, महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं
2.श्रीमान - “समस्या-सुलझाने-वालें” और श्रीमती “घर–सुधार समिति”
3.पुरुष अपनी गुफा में चले जाते हैं और महिलाएँ बोलती बहुत हैं
4.जीवनसाथी को प्रेरित कैसे करें
5.दोनों अलग–अलग भाषाएँ बोलते हैं
6.पुरुष रबर बैंड की तरह होते हैं
7.महिलाएँ लहरों की तरह होती हैं
8.दोनों की भावनात्मक आवश्यकताएँ अलग–अलग होती हैं
9.बहस से कैसे बचा जाए
10.अपने प्रेमी या अपनी प्रेमिका का दिल कैसे जीतें
11.जब आप परेशान हों तो प्रेमपत्र लिखें
12.सहायता कैसे माँगें और पाएँ
13.प्यार के जादू को ज़िंदा कैसे रखें
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प्रस्तावना

मेरी बेटी लॉरेन को पैदा हुए सिर्फ़ सात दिन ही हुए थे । मैं और मेरी पत्नी बॉनी बुरी तरह थके हुए थे । हर रात लॉरेन हमें सोने नहीं देती थी । बॉनी को दर्द की दवा लेनी पड़ती थी । चलने - फिरने में भी उसे दिक्क़त होती थी । पाँच दिन तक घर पर उसकी देखभाल करने के बाद मैंने सोचा कि अब उसकी हालत पहले से सुधर गई है और इसलिए मैं ऑफ़िस चला गया ।
जब मैं ऑफ़िस में था, तो बॉनी की दर्द की गोलियाँ ख़त्म हो गईं । बजाय इसके कि वह ऑफ़िस में फ़ोन करके मुझे बताती, उसने मेरे भाई से गोलियाँ लाने के लिए कहा, जो उसके हालचाल पूछने गया था । भाई भूल गया और लौटकर नहीं आया । नतीजा यह हुआ कि पूरे दिन बॉनी दर्द से कराहती रही और अकेले ही बच्ची को सँभालती रही ।
जब मैं लौटा तो वह बुरी तरह दुखी थी । मैंने सोचा शायद वह अपनी तकलीफ़ के लिए मुझे ज़िम्मेदार ठहरा रही थी । मुझे लगा वह अपनी परेशानियों के लिए मुझे दोष दे रही थी ।
उसने कहा, “मैं पूरे दिन दर्द से तड़पती रहीं. . . . मेरी दर्द की गोलियाँ ख़त्म हो गई थीं । मैं बिस्तर से उठ नहीं सकती और किसी को मेरी परवाह नहीं है!”
मैंने रक्षात्मक अंदाज़ में कहा, “तुमने मुझे फ़ोन क्यों नहीं किया?”
उसने जवाब दिया, “मैंने तुम्हारे भाई से गोलियाँ लाने के 10 मेन आर फ़्राॅम मार्स, विमेन आर फ़्राॅम वीनस लिए कहा था, परंतु वह भूल गया ! मैं सारा दिन उसके लौटने का इंतज़ार करती रही । मैं इसके सिवा कर भी क्या सकती थी ? मैं तो बिस्तर से हिल भी नहीं सकती । मैं बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ ?”
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इस बिंदु पर मैं फट पड़ा । उस दिन मेरा पारा भी चढ़ा हुआ था । मैं इसलिए ग़ुस्सा था क्योंकि उसने मुझे फ़ोन नहीं किया था । मैं इसलिए ग़ुस्सा था क्योंकि जब मुझे उसके दर्द का पता ही नहीं था, फिर वह मुझे दोषी क्यों मान रही थी ? कुछ कटु शब्द कहने के बाद मैं दरवाज़े की तरफ़ बढ़ा । मैं थका हुआ था, चिड़चिड़ा था और मैं और ज़्यादा शिकायतें नहीं सुनना चाहता था । हम दोनों ही अपना अापा खो चुके थे ।
फिर ऐसा कुछ हुआ जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी ।
बॉनी ने कहा, "ज़रा ठहरो, प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ । इसी वक़्ते तो मुझे तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है । मैं दर्द में तड़प रही हूँ । मैं कई दिनों से सोई नहीं हूँ । प्लीज़ मेरे पास बैठकर मेरी बात सुनो ।”
मैं एक पल ठहर गया ।
उसने कहा, “जॉन ग्रे, तुम बड़े मतलबी दोस्त हो, तुम केवल अच्छे वक़्त के साथी हो । जब तक मैं अच्छी और प्यारी बॉनी हूँ, तब तक तो तुम मेरे आगे-पीछे घूमते रहते हो, परंतु जब मैं परेशान या दुखी होती हूँ, तो तुम मुझे छोड़कर चल देते हो ।”
फिर वह थोड़ा ठहरी और मैंने देखा उसकी आँखों में आँसू थे । उसने कहा, “अभी मैं कष्ट में हुँ । मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है, इसी वक़्त मुझे तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है । प्लीज़ यहाँ आओ और मुझे थामो । तुम्हें कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है । मैं सिर्फ़ इतना चाहती हूँ कि तुम मुझे बाँहों में ले लो । प्लीज़, मुझे छोड़कर मत जाओ ।”
मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया । वह मेरे कंधे पर सिर रखकर रोती रही । कुछ मिनट बाद उसने मुझे धन्यवाद दिया कि उसके मुश्किल समय में मैं उसे अकेला छोड़कर नहीं गया था ।
उसी क्षण मैंने प्रेम का सच्चा अर्थ समझना शुरू किया-बिना शर्त का प्रेम । मैं अपने आपको अच्छा प्रेमी समझा करता था, परंतु शायद मेरी पत्नी सही कहती थी । मैं मतलबी इन्सान था, मैं केवल अच्छे वक़्त का साथी था । जब तक वह ख़ुश और बढ़िया रहती थी, मैं उसे बदले में प्रेम देता था । परंतु जब वह नाख़ुश या अपसेट रहती थी, मुझे ऐसा लगता था जैसे वह मुझे दोष दे रही है और फिर मैं या तो बहस करने लगता था या उससे दूर चला जाता था ।
उस दिन पहली बार मैं उसे छोड़कर नहीं गया । मैं ठहर गया और इससे मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ । जब उसे सचमुच मेरी ज़रूरत थी, तब मैं उसे प्रेम दे रहा था । यही तो सच्चे प्रेम का अर्थ था । जब मुझे रास्ता दिखा दिया गया, तो मेरे लिए प्रेम करना कितना आसान हो गया ।
मैं यह अपने आप क्यों नहीं समझ पाया था ? उसे सिर्फ़ यह चाहिए था कि मैं उसे बाँहों में ले लूँ ताकि वह मेरे कंधे पर सिर रखकर रो सके । शायद दूसरी महिला अपने आप समझ जाती कि बॉनी को क्या चाहिए था । परंतु चूँकि मैं एक पुरुष था, इसलिए मुझे यह पता नहीं था कि छूना, आलिंगन करना, बाँहों में लेना, उसकी बात सुनना उसके लिए इतना ज़्यादा महत्वपूर्ण था । मेरे और उसके बीच के अंतर को जान लेने के बाद हमारे बीच के संबंध और मधुर हो गए ।
इससे मुझे इस बात की प्रेरणा भी मिली कि मैं इस विषय पर शोध करूँ कि पुरुष स्वभाव और महिला स्वभाव में क्या अंतर होते हैं । सात साल के शोध के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि पुरुष अलग तरह से सोचते हैं, महिलाएँ अलग तरह से और दोनों के बीच विवाद अक्सर इसी कारण होते हैं क्योंकि दोनों को ही अपनी भिन्नताओं का पता नहीं होता ।
जब मैंने सेमिनारों में इस बारे में विस्तार से बताया तो हज़ारों शादियाँ टूटने से बच गईं । लोग मुझे धन्यवाद देते हैं कि मैंने उनकी शादी टूटने से बचा ली है, सच तो यह है कि प्रेम के कारण उनकी शादी बच गई, परंतु यह भी सच है कि अगर उन्हें अपोज़िट सेक्स के सोचने के तरीक़े की जानकारी नहीं होती, तो उनमें निश्चित रूप से तलाक़ हो जाता ।
हालाँकि सभी इस बात पर सहमत हैं कि पुरुषों और महिलाओं में भिन्नता होती है, परंतु वे कितने भिन्न होते हैं, यह ज़्यादातर लोग नहीं जान पाते । मैंने 25,000 लोगों के सर्वे के बाद यह खोज ही लिया कि महिला और पुरुष कितने और किस तरह भिन्न होते हैं ।
इस पुस्तक में दिए गए सभी सिद्धांत आज़माए हुए हैं, । 25,000 लोगों में से 90 प्रतिशत लोगों को इस पुस्तक में अपनी झलक दिखी । अगर आप इस पुस्तक को पढ़ते समय सिर हिला रहे हों और कह रहे हों, “हाँ, आप मेरे बारे में ही बात कर रहे हैं,” तो आप अकेले नहीं हैं । इस पुस्तक से हज़ारों लोगों को लाभ पहुँचा है, और आपको भी पहुँच सकता है ।
बहुत सारे लोग अपने वैवाहिक जीवन में संघर्ष करते रहते हैं । उनके जीवन में इतना तनाव, द्वेष और झगड़ा सिर्फ़ इसलिए होता है क्योंकि वे एक-दूसरे को नहीं समझ पाते । हालाँकि वे अपने पार्टनर को प्रेम करते हैं, परंतु जब तनाव होता है तो वे नहीं जानते कि ऐसे समय माहौल को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है । जब आप यह जान लेंगे कि महिलाएँ किस तरह सोचती हैं, व्यवहार करती हैं, किस तरह प्रतिक्रिया करती हैं तो आप उनसे बेहतर रिश्ता बना सकेंगे ।
पुरुष और महिलाएँ न सिर्फ़ अलग-अलग तरीक़ों से बोलते हैं, बल्कि वे अलग-अलग तरीक़ों से सोचते, महसूस करते, देखते, प्रतिक्रिया करते, प्रेम करते, तारीफ़ करते हैं । ऐसा लगता है जैसे वे अलग-अलग ग्रहों से आए हैं, उनकी भाषाएँ अलग हैं और उन्हें अलग-अलग चीज़ों की ज़रूरत होती है ।
भिन्नताओं को समझ लेने के बाद हमारे लिए अपोज़िट सेक्स को समझना आसान हो जाता है । हमारी ग़लतफ़हमियाँ दूर हो जाती हैं । हम सामने वाले से जो अपेक्षाएँ रखते हैं, उनमें भी सुधार हो जाता है । जब आप यह जान लेते हैं कि सामने वाला आपसे उतना ही अलग है जितना कि कोई दूसरे ग्रह का प्राणी, तो आप उसे बदलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि निश्चिंत होकर उसके साथ सहयोग करते हैं ।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पुस्तक में आपको हर जगह वैवाहिक समस्याओं को सुलझाने के प्रैक्टिकल तरीक़े मिलेंगे । विवाह में समस्याएँ तो रहेंगी, क्योंकि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं । परंतु अगर आप अपने बीच के अंतर को समझ लें तो आपकी आधी समस्याएँ तो अपने आप ही दूर हो जाएँगी ।
इस पुस्तक के बारे में इकलौती आलोचना यही हुई, “काश आपने हमें यह पहले बताया होता !”
इस पुस्तक को लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि आपका विवाह सुखमय हो, शांतिपूर्ण हो । यह ज़रूरी है कि सुखी विवाहों की संख्या बढ़े और तलाक़ों की संख्या घटे - क्योंकि हमारे बच्चे बेहतर दुनिया में जीने योग्य हैं ।
अध्याय 1
पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं, महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं
ल्पना कीजिए कि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से । बहुत पहले की बात है । एक दिन मंगल ग्रह के पुरुष अपनी दूरबीन से अंतरिक्ष में देख रहे थे । तभी उन्हें शुक्र ग्रह पर महिलाएँ दिखीं । सिर्फ़ उनकी एक झलक ने ही मंगल ग्रह के पुरुषों को मोहित कर दिया । उन्हें पहली नज़र में ही शुक्र ग्रह की महिलाओं से प्यार हो गया और वे तत्काल अंतरिक्ष यान बनाकर शुक्र ग्रह की तरफ़ चल पड़े ।
शुक्र ग्रह की महिलाओं ने मंगल ग्रह के पुरुषों का बाँहें फैलाकर स्वागत किया । वे सहज अनुभूति से जानती थीं कि ऐसा दिन आएगा जब मंगल ग्रह के पुरुष उनके ग्रह पर आएँगे । उनके दिल में ऐसा प्रेम उमड़ रहा था जो उन्हें इससे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था ।
मंगल ग्रह के पुरुषों और शुक्र ग्रह की महिलाओं का प्रेम जादुई था । उन्हें साथ रहने में आनंद आता था, साथ–साथ काम करना अच्छा लगता था और एक–दूसरे से बातें करते हुए वे कभी नहीं थकते थे । हालाँकि वे अलग–अलग ग्रहों के थे, परंतु आपसी भिन्नताओं के कारण उनका आनंद और भी बढ़ गया था । उन्होंने एक–दूसरे को जानने, सीखने और समझने में महीनों लगा दिए ताकि वे एक–दूसरे की ज़रूरतें, रुचियाँ, व्यवहार के तरीके समझ सकें । सालों तक वे प्रेम और सौहार्द्र के माहौल में रहे ।
फिर एक दिन उन्होंने धरती पर जाकर रहने का फ़ैसला किया । यहाँ उन्हें शुरुआत में तो हर चीज़ बहुत अद्भूत और सुंदर लगी । परंतु धरती के माहौल ने अपना असर दिखाया और एक सुबह जब वे जागे तो उनकी याददाश्त जा चुकी थी । वे भूल गए कि वे–अलग–अलग ग्रहों से आए थे और वे यह भी भूल गए कि अलग–अगल ग्रहों से आने के कारण उनमें भिन्नताएँ होना स्वाभाविक था । वे अपनी भिन्नताओं के बारे में भूल गए । उसी दिन से पुरुष और महिला आपस में लड़ने लगे ।
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अपनी भिन्नताएँ याद रखना
यह जाने बिना कि हममें भिन्नताएँ हैं, पुरुष और महिला हमेशा एक–एक–दूसरे से लड़ते ही रहेंगे । हम आम तौर पर अपोज़िट सेक्स से इसलिए परेशान रहते हैं क्योंकि हम इस महत्वपूर्ण सत्य को भूल चुके हैं । हम चाहते हैं कि अपोज़िट सेक्स का व्यक्ति भी हमारे जैसा ही हो । उसकी भी वही इच्छाएँ हों, जो हमारी हैं और वह भी उसी तरीक़े से सोचे जिस तरह से हम सोचते हैं ।
पुरुष आशा करते हैं कि महिलाएँ उसी तरह से सोचें और बातें करें जिस तरह से पुरुष करते हैं । महिलाएँ उम्मीद करती हैं कि पुरुष उसी तरह से अनुभव करें और चर्चा करें जिस तरह से महिलाएँ करती हैं । हम यह भूल गए हैं कि पुरुष और महिलाएँ अलग–अलग–तरह से सोचते, बोलते और व्यवहार करते हैं । उनमें भिन्नता स्वाभाविक है । इसका परिणाम यह होता है कि हममें अनावश्यक संघर्ष और तनाव होता है ।
परंतु जब आप यह जान लेते हैं कि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं, तो आपकी सारी दुविधा समाप्त हो जाती है और आप प्रेम से एक साथ रह सकते हैं ।
अच्छे इरादे ही काफ़ी नहीं हैं
प्रेम में पड़ना जादुई अनुभव है । ऐसा लगता है दीवानगी का यह दौर हमेशा चलता रहेगा और कभी ख़त्म नहीं होगा । हम नादानी में ऐसा सोचते हैं कि हमारे जीवन में वे समस्याएँ नहीं आएँगी जो हमारे माता–पिता या दूसरे लोगों के वैवाहिक जीवन में आई थीं । हम यह सोचते हैं कि हम ज़िंदगी भर एक–दूसरे के दीवाने बने रहेंगे और ख़ुशी–ख़ुशी एक–दूसरे के साथ जीवन बिता देंगे ।
परंतु जादू धीरे–धीरे कम होता जाता है और शादी के कुछ समय बाद ही हमें एक–दूसरे की कमियाँ नज़र आने लगती हैं । पुरुष यह अपेक्षा रखते हैं कि महिलाएँ उनकी तरह सोचें और व्यवहार करें, जबकि महिलाएँ यह उम्मीद करती हैं कि पुरुष महिलाओं की तरह सोचें । चूँकि उन्हें अपनी भिन्नताओं का एहसास नहीं होता इसलिए वे एक–दूसरे को ठीक से समझ नहीं पाते और एक–दूसरे की भावनाओं का सम्मान नहीं कर पाते । प्रेम से शुरू हुई बहुत सी कहानियाँ इसीलिए तलाक़ पर ख़त्म होती हैं, क्योंकि समस्याएँ धीरे–धीरे बढ़ने लगती हैं । दोनों की बोलचाल कम होती जाती है । आपसी विश्वास कम होने लगता है । दोनों एक–एक–दूसरे को नीचा दिखाना शुरू कर देते हैं । उनमें बहस होती है, झगड़े होते हैं तनाव होता है, आँसू बहाए जाते हैं । प्रेम का जादुई महल ताश के पत्तों की तरह ढेर हो जाता है और सारे आसमानी सपने मिट्टी में मिल जाते हैं ।
हम ख़ुद से पूछते हैं :
यह कैसे हुआ ?
यह क्यों हुआ ?
यह सबके साथ क्यों होता है ?
इन सवालों के बहुत से दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक जवाब दिए जा सकते हैं, फिर भी समस्या ज्यों की त्यों रहती है । प्रेम का हरा–भरा वृक्ष धीरे–सूख जाता है और मर जाता है । यह लगभग हर एक के साथ होता है ।
दुनिया में हर साल करोड़ों लोग प्यार करते हैं, शादी करते हैं और तलाक़ लेते हैं क्योंकि उनका प्यार कहीं ग़ुम हो गया । ऐसा अनुमान है कि जो लोग शादी करते हैं, उनमें से लगभग पचास प्रतिशत लोगों का तलाक़ हो जाता है और जो बाक़ी बचते हैं उनमें से भी पचास प्रतिशत लोग प्रेम के कारण इकट्ठे नहीं रहते, बल्कि वफ़ादारी, सामाजिक प्रतिष्ठा या एक बार फिर से शुरू करने के डर के कारण साथ–साथ रहते हैं ।
बहुत कम लोग पूरी ज़िंदगी वैवाहिक प्रेम का आनंद ले पाते हैं । परंतु ऐसा होता है, ऐसा हो सकता है । जब पुरुष और महिलाएँ अपनी भिन्नताओं को समझ लेते हैं, उनका सम्मान करते हैं तो प्रेम का गुलाब आपके आँगन में हमेशा के लिए खिल उठता है ।
प्रेम सचमुच जादुई अनुभव है, और यह हमेशा बना रह सकता है, परंतु तभी जब हमें अपनी भिन्नताओं का एहसास हो ।
हमने मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए लिंक निचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 4.4 MB है और कुल पेजों की संख्या 100 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक   जॉन ग्रे / John Gray   हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus को जरूर शेयर करेंगे। धन्यवाद।।
Q. मेन आर फ्रॉम मार्स , वीमेन आर फ्रॉम वीनस / Men are from Mars, Women are from Venus किताब के लेखक कौन है?
Answer.   जॉन ग्रे / John Gray  
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