साथ रहना, अज़नबी / Sath Rehana, Ajnabi / All Yours, Stranger in Hindi by Novoneel Chakraborty

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साथ रहना, अज़नबी, नोवोनेल चक्रवर्ती द्वारा स्ट्रेंजर ट्राइलॉजी श्रृंखला का दूसरा भाग है। रिवाना बनर्जी के इर्दगिर्द यह कथानक घूमता है, जो कोलकाता से है, जो मुंबई के विशिष्ट जीवन पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है। उसका एक अद्भुत प्रेमी है, फिर भी अपने पूर्व प्रेमी के बारे में सोचने का जुनून है। यद्यपि उसने उसके साथ धोखा किया, वह इस तथ्य को नजरअंदाज करने के लिए तैयार है। स्ट्रेंजर अब तक कहीं भी नहीं मिला है क्योंकि पुलिस ने उसका शिकार करना शुरू कर दिया था, हालांकि यह एक असफल प्रयास रहा है।

इस रहस्य रूपक में रिवाँ के लिए जो प्रश्न हैं, उनका उत्तर चाहिए; वास्तव में यह अजनबी कौन है? रिवाना के जीवन में आने का उसका उद्देश्य क्या है? क्या वह कभी उससे दोबारा संपर्क कर पाएगा?

इस तरह के सवाल रिवाणा को लगातार परेशान करते रहे हैं। इस आदमी के आसपास के रहस्य के बारे में उदासीन, वह अपने जीवन में अजनबी को वापस चाहती है।

जैसा कि कहानी आगे बताती है, सच तथ्य जो प्रकाश में आते हैं, वह वह है जो रिवाना कभी सोच भी नहीं सकती थी। इस कहानी में एक शातिर और क्रूर साजिश है, जिसके कई रहस्य अपने आप सामने आते हैं, क्योंकि पाठक इस कहानी में आगे बढ़ता है। इस मनोरंजक कथानक में पुस्तक के अंतिम पन्ने तक पाठक को उसके नाखून काटने को मजबूर कर देती है।

हिया चौधुरी के बारे में अपनी मां को फोन करके पूछने के पंद्रह दिन बाद रिवाना ने अचानक
कोलकाता आने का फैसला कर लिया। रिवाना के मम्मा-बाबा इस बात को लेकर खुश थे कि वो
इतने दिनों बाद घर आ रही है। मुंबई जाने के बाद ये पहला मौका था कि रिवाना इस तरह बिना
किसी वजह के घर आ रही थी। रिवाना हिया के बारे में अपनी मां से बात करने के तुरंत बाद ही
कोलकाता आना चाहती थी, लेकिन क्लाइंट के प्रोजेक्ट की वजह से उसे छुट्टी नहीं मिल सकी
थी। इसलिए जैसे ही क्लाइंट मुंबई से विदा हुए, वैसे ही रिवाना ने कोलकाता के लिए टिकट बुक
करा लिए।
रिवाना पिछले दो हफ्तों से ठीक से सो भी नहीं पाई थी। उसके ज़ेहन में एक ही नाम घूमता
रहा था: हिया चौधुरी| रिवाना को सिर्फ इतना याद था कि हिया इंजीनियरिंग में उसकी बैचमेट
हुआ करती थी। अजीब बात ये थी कि रिवाना को उसकी हंसी और नाम याद था, लेकिन उसका
चेहरा नहीं याद था। बावजूद इसके हिया उसके स्क्रैपबुक में थी। उस अजनबी ने हिया की हंसी को
दरवाज़े की घंटी क्यों बना रखा था? क्यों हिया की दिलचरिपयां वो अजनबी रिवाना में डालना
चाहता था? ये साफ था कि दोनों के बीच कोई कड़ी थी, और वो कड़ी क्या हो सकती थी, यही
सोच-सोचकर रिवाना अपनी नींद और वैन गंवा चुकी थी। ऊपर से इंस्पेक्टर कांबले और क्राइम
ब्रांव के अफसर भी मिलकर अजनबी की पहेली सुलझा नहीं पाए थे। हाथ आया था तो सिर्फ एक
अभिराज, जिसे गलती से स्टारबक्स में पकड़ लिया गया था। उससे भी खास बात ये कि अजनबी
ने पिछले चौदह दिनों से रिवाना से कोई संपर्क नहीं किया था।
रिवाजा की मां बरामदे में खड़ी होकर इंतज़ार कर रही थी, लेकिन जैसे ही रिवाना टैक्सी से
उतरी, वो दौडती हई अपने कमरे की ओर गई। वो अपनी मां से मिलने तक के लिए नहीं रुकी।

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