सत्य के साथ मेरे प्रयोग / Satya Ke Sath Mere Prayog PDF Download Free Hindi Book by Mahatma Gandhi ki Aatmakatha

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥सत्य के साथ मेरे प्रयोग / Satya Ke Sath Mere Prayog
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 1.8 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖198
Last UpdatedMarch 7, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category

आपको मानवता में विश्वास नहीं खोना चाहिए। मानवता सागर के समान है; यदि सागर की कुछ बूँदें गन्दी हैं, तो पूरा सागर गंदा नहीं हो जाता।

  • सत्य के साथ मेरे प्रयोग मैं जो प्रकरण लिखने वाला हूँ, इनमें यदि पाठकों को अभिमान का भास हो, तो उन्हें अवश्य ही समझ लेना चाहिए कि मेरे शोध में खामी है और मेरी झाँकियाँ मृगजल के समान हैं। मेरे समान अनेकों का क्षय चाहे हो, पर सत्य की जय हो। अल्पात्मा को मापने के लिए हम सत्य का गज कभी छोटा न करें।
  • मैं चाहता हूँ कि मेरे लेखों को कोई प्रमाणभूत न समझे। यही मेरी विनती है। मैं तो सिर्फ यह चाहता हूँ कि उनमें बताए गए प्रयोगों को दृष्‍टांत रूप मानकर सब अपने-अपने प्रयोग यथाशक्‍ति और यथामति करें।
  • मुझे विश्‍वास है कि इस संकुचित क्षेत्र में आत्मकथा के मेरे लेखों से बहुत कुछ मिल सकेगा; क्योंकि कहने योग्य एक भी बात मैं छिपाऊँगा नहीं। मुझे आशा है कि मैं अपने दोषों का खयाल पाठकों को पूरी तरह दे सकूँगा। मुझे सत्य के शास्‍‍त्रीय प्रयोगों का वर्णन करना है। मैं कितना भला हूँ, इसका वर्णन करने की मेरी तनिक भी इच्छा नहीं है। जिस गज से स्वयं मैं अपने को मापना चाहता हूँ और जिसका उपयोग हम सबको अपने-अपने विषय में करना चाहिए। "—मोहनदास करमचंद गांधी"
  • राष्‍ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ हम सबको अपने आपको आँकने, मापने और अपने विकारों को दूर कर सत्य पर डटे रहने की प्रेरणा देती है।

 

***

मोहनदास करमचन्द गान्धी

 

  • मोहनदास करमचन्द गान्धी का जन्म भारत में गुजरात के एक तटीय शहर पोरबंदर में 2 अक्टूबर सन् 1869 को हुआ था। उनके पिता करमचन्द गान्धी ब्रिटिश राज के समय काठियावाड़ की एक छोटी सी रियासत (पोरबंदर) के दीवान थे।
  • मोहनदास की माता पुतलीबाई परनामी वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और अत्यधिक धार्मिक प्रवित्ति की थीं जिसका प्रभाव युवा मोहनदास पड़ा और इन्ही मूल्यों ने आगे चलकर उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वह नियमित रूप से व्रत रखती थीं और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा सुश्रुषा में दिन-रात एक कर देती थीं।
  • इस प्रकार मोहनदास ने स्वाभाविक रूप से अहिंसा, शाकाहार, आत्मशुद्धि के लिए व्रत और विभिन्न धर्मों और पंथों को मानने वालों के बीच परस्पर सहिष्णुता को अपनाया।
  • सन 1883 में साढे 13 साल की उम्र में ही उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा से करा दिया गया। जब मोहनदास 15 वर्ष के थे तब इनकी पहली सन्तान ने जन्म लिया लेकिन वह केवल कुछ दिन ही जीवित रही।

अनुक्रम

प्रस्तावना

जन्म

बचपन

बाल-विवाह

दुःखद प्रसंग

चोरी और प्रायश्‍चित

पिताजी की मृत्यु और मेरी दोहरी लज्जा

धार्मिक समभाव का विकास

विलायत की तैयारी

जाति बहिष्कृत

पहला मुकदमा

पहला आघात

दक्षिण अफ्रीका जाने की तैयारी

दक्षिण अफ्रीका में

प्रिटोरिया जाते हुए

प्रिटोरिया में पहला दिन

ईसाइयों से संपर्क

हिंदुस्तानियों से परिचय

कुली समझे जाने का अनुभव

मुकदमे की तैयारी

आखिर लंदन पहुँचा!

मेरी पसंद

'सभ्य' अंग्रेजी पोशाक में

लज्जाशीलता—मेरी ढाल

असत्य रूपी विष

विभिन्न धर्मों से परिचय

निर्बल के बल राम

बैरिस्टर के रूप में भारत वापसी

रायचंदभाई

सांसारिक जीवन-प्रवेश

ईश्‍वर-इच्छा सर्वोपरि

नेटाल में बस गया

नेटाल इंडियन कांग्रेस

तीन पौंड का कर

हिंदुस्तान मेंबच्चों की शिक्षा

सेवा-वृत्ति

ब्रह्मचर्य

सादगी

बोअर-युद्ध

Continue.......

हमने सत्य के साथ मेरे प्रयोग / Satya Ke Sath Mere Prayog PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए लिंक निचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 1.8 MB है और कुल पेजों की संख्या 198 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक   महात्मा गांधी / Mahatma Gandhi   हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ सत्य के साथ मेरे प्रयोग / Satya Ke Sath Mere Prayog को जरूर शेयर करेंगे। धन्यवाद।।
Q. सत्य के साथ मेरे प्रयोग / Satya Ke Sath Mere Prayog किताब के लेखक कौन है?
Answer.   महात्मा गांधी / Mahatma Gandhi  
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