आवाहन / Awaahan by Arun Kumar Sharma Download Free PDF

महात्मा ने ध्यान से मेरी ओर देखा और फिर एकबारगी चौंक कर बोले – तुम… तुम… पूर्णानन्द सरस्वती हो न? यह सुनकर आश्चर्य हुआ मुझे! सोचा भ्रम हो गया है महात्मा को। बोला – नहीं महाशय, मैं पूर्णानन्द सरस्वती नहीं हूँ। आपको समझने में गलती हुई है। नहीं, ऐसा कदापि नहीं हो सकता। मुझसे आपको पहचानने में भूल नहीं हो

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वक्रेश्वर की भैरवी / Vakreshwar Kee Bhairavi by Arun Kumar Sharma Download Free PDF

उस समय सेवड़ासिंघा अपने महल की छत पर ध्यानस्थ बैठा हुआ था। उसको क्या पता था कि उसकी मृत्यु सामने आ रही है। उसने अपनी ओर आते हुए विशाल शिलाखण्ड की सनसनाती हुई आवाज सुनी तो आँखें खोल कर देखा। वह पल भर में समझ गया कि मृत्यु सिर पर आ चुकी है। अपनी तन्त्रविद्या से उस विशाल शिलाखण्ड को

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