इश्क़ में शहर होना | Ishq me Shahar hona

एक टीवी पत्रकार ने जैसा जिया शहर को लिखा, लिखी उसमे पलनेवाले प्रेम की लघु कथाओं की श्रद्धा। चौथा राजकमल प्रकाशन शाजिक गद्य सम्मान से सम्मानित कृति। “प्रेम हम सबको बेहतर शहरी बनाता है! हम शहर के हर अनजान कोने का सम्मान करने लगते हैं! उन कोनों में जीवन भर देते हैं …. आप केवल एक शहर को नए सिरे से खोजते हैं जब

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बोलना ही है : लोकतंत्र, संस्कृति, और राष्ट्र के बारे में | Bolna hi hai

  रवीश कुमार की यह किताब ‘बोलना ही है’ इस बात की पड़ताल करती है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस-किस रूप में बाधित हुई है, परस्पर सम्वाद और सार्थक बहस की गुंजाइश कैसे कम हुई है और इससे देश में नफ़रत और असहिष्णुता को कैसे बढ़ावा मिला है। कैसे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि, मीडिया और अन्य संस्थान

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