बिराज बहू / Biraj Bahu

नीलाम्बर और पीताम्बर नाम के दो भाई हुगली जिले के सप्तग्राम में रहते थे । मुर्दे जलाने, कीर्तन करने, ढोल बजाने और गांजा पीने में नीलाम्बर जैसा आदमी उस ओर और कोई नहीं था। उसके लम्बे और गोरे बदन में असाधारण शक्ति थी । परोपकार के लिए वह गांव में जितना विख्यात था, अपने गंवारूपन के लिए भी उतना ही

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बिराज बहू / Biraj Bahu

कहानी गरीब नीलाम्बर चक्रवर्ती के बारे में बताती है जो अपने विवाहित भाई पीताम्बर, अविवाहित बहन पुन्नू और पत्नी बिराज के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। वह अपनी बहन की शादी की व्यवस्था करता है और कुछ पैसे उधार लेता है लेकिन उसका भाई कोई भी खर्च देने से इनकार कर देता है और वह उनसे अलग हो जाता

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