आज़ादी मेरा ब्रांड / Azadi Mera Brand

“लोग कहते हैं कि बचपन के दिन सबसे ख़ास होते हैं, कोई टीन-एज खास बताता है तो कोई ट्वेंटीज़| मुझे तो ये वाली उम्र सबसे खास लगती है, जिसमे मैं हूँ। तीस को टच करती, सहज-सी, छुपी-सी, आसान-सी उम्र। हार्मोन्स रह-रह के उबाल नहीं मारते, नए-नए क्रश रात-रात भर नहीं जगाते, ब्रेक-अप्स रात-रात भर नहीं रुलाते। कहने को आप बोरिंग

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घुमक्कड़शास्त्र / Ghumakkad Shastra

घुमक्कड़शास्त्र महापण्डित राहुल सांकृत्यायन की प्रसिद्ध रचना है। घुमन्तू स्वभाव के कारण उन्होंने तिब्बत, सम्पूर्ण भारत, रूस, यूरोप सोवियत भूमि और श्रीलंका का भ्रमण किया था। और फिर उन्हीं अनुभवों को सँजोते हुए घुमक्कड़-शास्त्र लिख दिया। पुस्तक का कुछ अंश :- प्राक्कथन ‘धुमक्कड़ शास्त्र’ के लिखने की आवश्यकता मैं बहुत दिनों से अनुभव कर रहा था। मैं समझता हूँ और

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रोड ट्रिप 13000 फीट / Road Trip 13000 feet

तीन अनजाने जो मित्र बने। पहली मुलाकात और पहली ही मुलाकात में रोड ट्रिप की योजना, तीन यात्राएं, तीन पड़ाव, तीन कहानियां, लेकिन मंजिल एक। जिंदगी की परेशानियों और उलझनों से जूझ रहे तीन अनजाने दुनिया जहान को भुला कर एक अनोखे सफर पर निकल पड़े, एक ऐसे अनुभव के लिए जिसने उन्हें बदल कर रख दिया। यात्रा जो मुम्बई

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कण कण केदार / Kan Kan Kedaar

ऋषिकेश से चोपता तक का लगभग 200 कि.मी. का अंतर मानो कटने का नाम ही नही ले रहा था, मैंने अनुमान लगाया था कि 50 किमी प्रतिघन्टा भी यदि कैब चली तो भी अधिकतम 5 घण्टो में हम चोपता में रहेंगे, लेकिन सारा गणित तब बिगड़ गया जब गाड़ी 30 किमी प्रतिघन्टा के हिसाब से चलने लगी। ऊपर से चार

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पृथ्वी के छोर पर / Prithvi Ke Chhor Par

इस पुस्तक में डॉ. शरदिन्दु मुकर्जी ने, उन यात्राओं के दौरान हुए अपने विभिन्न अनुभवों को साझा किया है। जटिल वैज्ञानिक तथ्यों से बोझिल न होकर अपनी रोचकता लिये पुस्तक में वर्णित तमाम घटनाक्रम, सभी वर्ग और वय के पाठकों के लिए रोमांचक कहानी की तरह ही नहीं, बल्कि भविष्य के अभियात्रियों के लिए मार्गदर्शक की तरह भी है।

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फक्कड़ घुमक्कड़ के किस्से : यात्रा और स्वाद की अनंत कथाएं / Fakkad Ghumakkad ke kisse

घुमक्कड़ी और भारत के विभिन्न शहरो की गलियों के स्वादों पर लिखी गयी इस पुस्तक में कुल 224 पन्ने है जिसमे 216 पन्ने BW और 8 पन्ने रंगीन है। यह पुस्तक आपको बनारस, इंदौर, अजमेर, चित्तौर, कुंभलगढ़, मुरथल, अम्बाला, कुरुक्षेत्र, लुधियाना और पुष्कर की गलियों और स्वादों से रूबरू करवाएगी, वहीँ आपको हिमाचल के सुदूर इलाको जैसे घियाघी , सैंज

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आओ नैनीताल चलें : यात्रा वृत्तांत / Aao Nainitaal Chale

गद्य साहित्य की विविध विधाओं में ‘यात्रा-वृत्त’ का अपना ही महत्व है। ‘अज्ञेय’ जी की काव्यात्मक गद्य भाषा में जब उन के यात्रा-वर्णन प्रकाशित हो रहे थे, तब इस विधा-विशेष ने ध्यान आकर्षित किया था। रांगेय राघव ने बंगाल के अकाल पर गद्य-विधा में यात्रा-वृत्त, डायरी तथा रिपोर्ताज को मिला कर एक नया रूप प्रस्तुत किया था। प्रकृति के प्रति

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पैडल पैडल / Paddle Paddle

जब लेखक ने अपने एक मित्र की देखा-देखी अत्यधिक महँगी साइकिल खरीद ली, तो उनके सामने प्रश्न उठा, कि अब इसका क्या करें? यही प्रश्न धीरे-धीरे उत्तर में बदल गया, और महाशय ने आव देखा न ताव; पहुँच गए साइकिल लेकर मनाली; फिर मनाली से लेह, आगे लेह से श्रीनगर; और कुल लगभग 950 किलोमीटर की दुर्गम और कठिन यात्रा

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हमसफ़र एवरेस्ट / Hamsafar Everest

‘हमसफ़र एवरेस्ट’ एक यात्रा-वृत्तांत है, एवरेस्ट बेस कैंप के साथ-साथ गोक्यो झीलों का भी। नेपाल में भारतीयों के लिए किसी वीज़ा-पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती, तब भी वह है तो विदेश ही। अलग करेंसी, अलग टाइम-ज़ोन, अलग नेटवर्क, अलग भाषा, अलग खान-पान। इन सबके बीच एक भारतीय दंपत्ति ने किस तरह तालमेल बैठाया, यह पढ़ना आपको रोमांचक अवश्य लगेगा। अपनी

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सुनो लद्दाख / Suno Laddakh

सुनो लद्दाख! एक यात्रा-वृत्तान्त है, जिसमें लेखक द्वारा लद्दाख में की गई पैदल-यात्राओं, अर्थात ट्रैकिंग का वर्णन है। किताब के मुख्यत: दो भाग हैं – पहला, चादर ट्रैक, और दूसरा, जांस्कर ट्रैक। चादर ट्रैक, सर्दियों में, खासकर जनवरी और फरवरी में ही होता है। नीरज, इस ट्रैक के द्वारा यह देखना चाहते थे, कि सर्दियों में लद्दाख कैसा होता है,

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अस्सी दिन में दुनिया की सैर | Assi Din Me Duniya Ki Sair

अस्सी दिन में दुनिया की सैर—जूल्स वर्नफिलियास फॉग ने अपनी विश्‍व यात्रा 80 दिनों में पूरी की थी। उन्होंने इसके लिए हर साधन का उपयोग किया—स्टीमर; रेलवे; सामान ढोनेवाली गाड़ी; व्यापारिक जहाज; बर्फ पर चलनेवाली गाड़ी और हाथी इत्यादि। फॉग ने 80 दिनों में पूरा विश्‍व भ्रमण करने के ठीक 2 दिन बाद शादी कर ली; जो इस यात्रा की

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गुप्‍त भारत की ख़ोज / Gupt Bharat ki Khoj

मैं योगियों की खोज मैं पूर्वी दिशा की यात्रा करते हुए भारत की पवित्र नदियों के तटों पर गया. मैंने पूरे देश का भ्रमण किया, और फिर मैं भारत के ह्रदय तक पहुँचा… पॉल ब्रन्टन पूर्वी जगत की आध्यात्मिक परम्पराओं की खोज में निकले बीसवीं शताब्दी के सबसे अहन खोजियों में से एक थे. वे एक पत्रकार भी थे और

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