अघोरी बाबा की गीता PDF | Aghori Baba Ki Gita

लेखक महोदय से मेरा परिचय फेसबुक के आभसी माध्यम से हुआ, शुरुआत की कोई भाग इत्तेफाक से या किन्हीं के द्वारा साझा करने से मैं पढ़ पाया था, अघोरी और गीता का समावेश “अघोरी बाबा की गीता” शीर्षक मुझे काफी आकर्षित किया। शुरू से कई भागों को पढ़ते वक्त रहस्य और रोमांच में डूबने जैसा ये पुस्तक आगे चलकर गीता

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कुरुक्षेत्र PDF | Kurukshetra

कुरुक्षेत्र एक हिंदी क्लासिक है। यह महाभारत में वर्णित कुरुक्षेत्र युद्ध का एक असाधारण विवरण देता है। यह पांडवों और कौरवों के बीच हुए सशस्त्र टकराव का विशद विवरण देता है। यह खूनी युद्ध अठारह दिनों तक चला। युद्ध पर लेखक के अपने विचार इस काम में दिखाए गए हैं। वह युद्ध की आलोचना करता है लेकिन यह भी स्वीकार

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मानव की निरन्तर खोज PDF | Man’s Eternal Quest

परमहंस योगानंद की एकत्रित वार्ता और निबंध एक योगी की आत्मकथा में लाखों लोगों को आकर्षित करने वाले प्रेरक और सार्वभौमिक सत्य की विशाल श्रृंखला की गहन चर्चा प्रस्तुत करते हैं। पाठक इन वार्ताओं को सर्वव्यापी ज्ञान, व्यावहारिक प्रोत्साहन और मानवता के प्रति प्रेम के अद्वितीय मिश्रण के साथ जीवंत पाएंगे, जिसने लेखक को आध्यात्मिक जीवन के लिए हमारे युग

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भक्तियोग | Bhaktiyoga

निष्कपट भाव से ईश्वर की खोज को ‘भक्तियोग’ कहते हैं। इस खोज का आरंभ, मध्य और अंत प्रेम में होता है। ईश्वर के प्रति एक क्षण की भी प्रेमोन्मत्तता हमारे लिए शाश्वत मुक्ति को देनेवाली होती है। ‘भक्तिसूत्र’ में नारदजी कहते हैं, ‘‘भगवान् के प्रति उत्कट प्रेम ही भक्ति है। जब मनुष्य इसे प्राप्त कर लेता है, तो सभी उसके

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गुरु-शिष्य संवाद PDF | Guru-Shishya Samvad

प्रस्तुत पुस्तक ‘गुरु-शिष्य संवाद’ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में वेद; उपनिषद् और वेदांत के बारे सारभूत व्याख्या की है और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से अपने शिष्यों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास किया है। उन्होंने अकाट्य तर्कों द्वारा वैश्विक ज्ञान के सागर को इस पुस्तक रूपी गागर में भर दिया है। एक अत्यंत प्रेरक और ओजपूर्ण

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पवनपुत्र हनुमान : रामायण के अमर पात्र PDF / Pawanputra Hanuman : Ramayan Ke Amar Patra

हनुमान राम के परम भक्त हैं। वह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाने वाले महाकाव्य रामायण के विभिन्न संस्करणों में केंद्रीय पात्रों में से एक है। चिरंजीवी में से एक के रूप में, उनका उल्लेख कई अन्य ग्रंथों, जैसे महाभारत, विभिन्न पुराणों और कुछ जैन, बौद्ध और सिख ग्रंथों में भी किया गया है। बाद के कई

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम : रामायण के अमर पात्र / Maryada Purushottam Shri Ram: Ramayan Ke Amar Patra

समस्त भारतीय साहित्य में रामायण भारतीय संस्कृति, सभ्यता और दर्शन के ऐसे आधार ग्रंथ हैं जिन्हें, प्रत्येक भारतीय बार-बार पढ़ना चाहता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम उसकी चेतना में साँस कि तरह रमे हैं। अपने पाठकों की ध्यान में रखते हुए हमने रामायण के प्रमुख पात्रों का औपनिवेशिक रूप कथा की सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है

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महासती सीता: रामायण के अमर पात्र / Mahasati Sita: Ramayan Ke Amar Patra

सीता रामायण और रामकथा पर आधारित अन्य रामायण ग्रंथ, जैसे रामचरितमानस, की मुख्य पात्र है। सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थी। इनका विवाह अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम से स्वयंवर में शिवधनुष को भंग करने के उपरांत हुआ था। इनकी स्त्री व पतिव्रता धर्म के कारण इनका नाम आदर से लिया जाता है। त्रेतायुग

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राम की शक्त्ति पूजा / Ram Ki Shakti Pooja

‘राम की शक्ति पूजा’ (ram ki shakti puja) काव्य को निराला जी ने 23 अक्टूबर, 1936 में पूरा किया था. इलाहाबाद से प्रकाशित दैनिक समाचारपत्र ‘भारत’ में पहली बार उसी वर्ष 26 अक्टूबर को इस कविता का प्रकाशन हुआ था. Nirala Ki Shakti Puja: सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ (Suryakant Tripathi Nirala) को ‘महाप्राण’ भी कहा जाता है. पुस्तक का कुछ अंश

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भगवद गीता: यथारूप / Bhagwat Geeta

शिक्षा और राजनीति के क्षेत्रों में भारत के लिए अद्वितीय उपलब्धियाँ हासिल करने वाले पूर्व उप राष्ट्रपति और राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन् ने इस पुसतक में भगवद्गीता को बहुत ही सहज-सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। लेखक के अपने शब्दों में, यह पुस्तक उस सामान्य पाठक को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो अपने आध्यात्मिक परिवेश का विसतार करना

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नित्य कर्म पूजा प्रकाश / Nitya Karma Puja Prakash

इस पुस्तक मे व्यक्ति के लौकिक और पारलौकिक उत्थान के लिये तथा नित्य-नैमित्तिक काम्य कर्मों के सम्पादन के लिये शास्त्रीय प्रक्रिया प्रस्तुत की गयी है। प्रातःकालीन भगवत्स्मरण से लेकर स्नान, ध्यान, संध्या, जप, तर्पण, बलिवैश्वदेव, देव-पूजन, देव-स्तुति, विशिष्ट-पूजन-पद्धति, पञ्चदेव-पूजन, पार्थिव-पूजन, शालग्राम-महालक्ष्मी-पूजनकी विधि तथा अन्तमें नित्यस्मरणीय स्तोत्रों का संग्रह होने से यह पुस्तक सबके लिये उपयोगी तथा संग्रहणीय है। पुस्तक का

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गीता प्रेस और हिन्दू भारत का निर्माण / Gita Press Aur Hindu Bharat Ka Nirman

साल 1920 के आरंभिक दशकों में ही व्यवसायी से आध्यात्मिक गुरु बने जयदयाल गोयन्दका और हनुमानप्रसाद पोद्दार नामक मारवाड़ियों ने गीता प्रेस की स्थापना और कल्याण पत्रिका के प्रकाशन की शुरुआत की। साल 2014 के आरंभ तक गीता प्रेस, गीता की तक़रीबन 7.2 करोड़, तुलसीदास की कृतियों की 7 करोड़ और पुराण तथा उपनिषद जैसे धर्मशास्त्रों की 1.9 करोड़ प्रतियां

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